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Patrakarita Ka Kaala Adhyay

$ 1.40

पुस्तक के बारे में- यह किताब सन 2001 के दौर में चौबीस घंटे के चैनलों की शुरुआत के बाद भारतीय पत्रकारिता के बदलते स्वरुप को समझने का एक प्रयास है। लोकतंत्र में चौथे स्तंभ की जिम्मेदारी क्या रही है और एजेंडा के तहत पत्रकारिता के जुनून में क्या जिम्मेदारी निभाई गई है, यह किताब उसी पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट है। सोशल मीडिया के दौर में मेनस्ट्रीम मीडिया कहां है और उसके लिए चुनौती क्या है ? इन चुनौतियों के सामने उसने संघर्ष किया या समर्पण, इस पर चर्चा जरुरी है। पत्रकारिता के छात्र के लिए भी यह समझना जरुरी है कि पत्रकारिता के इतिहास को जानकर उसके वर्तमान हालात से आंखें नहीं मूंदी जा सकती है। लेखक के बारे में- मनीष ठाकुर 20 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। सन 2000 में दिल्ली के जामिया मिल्लिया से मास कम्युनिकेशन करने के बाद देश के प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला एवं दैनिक जागरण में अपराध और अदालत की रिपोर्टिंग। 2005 से 2019 तक टीवी पत्रकारिता में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान बीएजी मीडिया हाउस द्वारा स्टार न्यूज के लिए बनाए जाने वाले चर्चित क्राईम शो ‘सनसनी’ टीम की अगुआई की। न्यूज चैनल ‘पी 7’ के लिए सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, गृहमंत्रालय से लेकर संसद की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते हुए सरकार के घपले घोटालों को लेकर निर्भीकतापूर्वक पत्रकारिता की। टीवी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को भांपते हुए इन्होंने तय किया कि आगे नौकरी नहीं करेंगे। नवंबर 2019 से लाईव बुलेटिन के जरिए जनता से सीधे संवाद की पत्रकारिता आरंभ की। इनका THE MANISH THAKUR SHOW के नाम से YOU TUBE चैनल है। मौलिक पुस्तक लेखन के क्षेत्र में यह इनका प्रथम प्रयास है। Categories: Kapot Prakashan, On Sale, Other Authors Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative) Tags: Books on Journalism, Journalism, kapot Books, Kapot Prakashan, Manish Thakur, Paperback
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